SEBI के नए PMS नियम 2026: ₹50 लाख की सीमा और नया PRIM रूट

DeepShodh TeamOctober 15, 202611 min read

SEBI ने 7 अक्टूबर 2026 को PMS नियम 2026 अधिसूचित किए — नया PRIM रूट ₹25 लाख, सामान्य PMS ₹50 लाख, नेट वर्थ शर्तें और नए निवेश रास्ते। आसान भाषा में पूरी गाइड।

अगर आप म्यूचुअल फंड से आगे बढ़कर किसी पेशेवर के हाथों अपना पोर्टफोलियो बनवाने की सोच रहे हैं, तो 7 अक्टूबर 2026 आपके लिए अहम तारीख़ है। उस दिन SEBI ने SEBI (Portfolio Managers) Regulations, 2026 अधिसूचित किए — यानी भारत के पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) उद्योग के 2020 वाले नियम पूरी तरह बदल दिए गए। नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे।

इस एक अधिसूचना में निवेशक के लिए तीन बड़ी बातें हैं। पहली — एक नया PRIM रूट, जहाँ न्यूनतम निवेश ₹50 लाख से घटकर ₹25 लाख हो गया, बशर्ते पैसा सिर्फ़ भारतीय म्यूचुअल फंड के डायरेक्ट प्लान में लगे। दूसरी — मैनेजरों की नेट वर्थ और निवेश की सीमाएँ पहले से ज़्यादा साफ़ हुईं। और तीसरी — निवेश के नए रास्ते खुले, जिनमें IPO, अनलिस्टेड डेट, डेरिवेटिव और विदेशी सिक्योरिटीज़ शामिल हैं।

भारी शब्दजाल छोड़िए। इस लेख में सिर्फ़ वह जानकारी है जो आपके फ़ैसले से जुड़ी है — क्या बदला, कब से लागू होगा, और आपको अभी क्या करना चाहिए (और क्या नहीं)।

एक नज़र में: अक्टूबर 2026 में PMS नियमों में क्या बदला?

क्या तय हुआनया नियम (1 अप्रैल 2027 से लागू)
PRIM रूट (केवल म्यूचुअल फंड वाला PMS)न्यूनतम निवेश ₹25 लाख, न्यूनतम नेट वर्थ ₹2 करोड़
सामान्य PMSन्यूनतम निवेश ₹50 लाख, न्यूनतम नेट वर्थ ₹5 करोड़
लिक्विड एसेट की शर्तनेट वर्थ का कम से कम 10% अनएनकम्बर्ड (मुक्त) लिक्विड रूप में
नए निवेश रास्तेIPO व प्राइमरी डेट, अनलिस्टेड इनवेस्टमेंट-ग्रेड डेट (सहमति से AUM का 10% तक), एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव (AUM का 1.25 गुना तक), विदेशी सिक्योरिटीज़
पुराने मैनेजरों को समयकुछ शर्तों के लिए 12 महीने, कुछ के लिए 36 महीने
फीस (PRIM)बोर्ड ने फिक्स्ड फीस को क्लाइंट AUM के 1% तक सीमित करने के संकेत दिए; बारीक शर्तें SEBI अलग से तय करेगा

याद रखने वाली एक बात: 31 मार्च 2027 तक पुराने 2020 के नियम ही चलेंगे। यानी यह बदलाव आज से नहीं, अगले वित्त वर्ष की शुरुआत से असर दिखाएगा।

30 सेकंड में फ़ैसला: आप किस स्थिति में हैं?

  • ₹25 लाख से कम: कोई PMS नहीं मिलेगा — कम खर्च वाले डायरेक्ट प्लान या इंडेक्स फंड और SIP ही आपका रास्ता है।
  • ₹25 लाख से ₹50 लाख: अभी PMS नहीं, पर 1 अप्रैल 2027 से PRIM रूट खुलेगा — ध्यान रहे, यह सिर्फ़ म्यूचुअल फंड के डायरेक्ट प्लान में निवेश करेगा और फीस लेगा।
  • ₹50 लाख से ज़्यादा: सामान्य PMS आपके लिए खुला है — शेयर, बॉन्ड, डेरिवेटिव और विदेशी सिक्योरिटीज़ सहित पूरा बाज़ार, पर फीस और जोखिम की समीक्षा के बाद ही।

PMS आख़िर क्या है, और म्यूचुअल फंड से कैसे अलग है?

PMS कैसे काम करता है

PMS यानी पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस। इसमें आप एक पंजीकृत पोर्टफोलियो मैनेजर को अपनी रक्कम सौंपते हैं और वह आपके नाम पर सीधे शेयर, बॉन्ड और दूसरी सिक्योरिटीज़ खरीदता-बेचता है। शेयर आपके ही डीमैट खाते में रहते हैं — मालिक आप, फ़ैसला मैनेजर का।

इसकी दो मुख्य क़िस्में हैं:

  • डिस्क्रेशनरी PMS (DPMS): मैनेजर हर खरीद-बिक्री के लिए आपकी मंज़ूरी लिए बिना फ़ैसला ले सकता है।
  • नॉन-डिस्क्रेशनरी PMS (NDPMS): हर फ़ैसले से पहले आपकी सहमति ज़रूरी है।

म्यूचुअल फंड, PMS और AIF में मुख्य फर्क

बिंदुम्यूचुअल फंडPMSAIF
पैसा किसके नाम पर लगता हैस्कीम का साझा पूलसीधे आपके नाम परफंड का पूल (सीमित निवेशक)
न्यूनतम रक्कम₹500 तक (SIP)₹50 लाखश्रेणी व नियम पर निर्भर
फ़ैसला कौन लेता हैफंड मैनेजर, सबके लिए एकआपका पोर्टफोलियो मैनेजरफंड मैनेजर
पारदर्शितामासिक पोर्टफोलियोहर होल्डिंग आपके नाम पर साफ़ दिखती हैसीमित पारदर्शिता
खर्चखर्च अनुपात (TER)फिक्स्ड + परफॉर्मेंस फीसप्रबंधन + परफॉर्मेंस फीस

नया PRIM रूट: ₹25 लाख में भी म्यूचुअल फंड वाला पोर्टफोलियो

PRIM का पूरा नाम है Portfolio Managers Route for Investing in Mutual fund units — यानी ऐसा PMS जो सिर्फ़ म्यूचुअल फंड यूनिट्स में निवेश करता है। यह नियम 2026 के छठे अध्याय में तय किया गया है और इसका पूरा लाभ एक ही है: कम सीमा, साफ़ दायरा।

PRIM और सामान्य PMS में फर्क

बिंदुसामान्य PMSPRIM रूट
न्यूनतम निवेश₹50 लाख₹25 लाख
कहाँ निवेश होगाशेयर, बॉन्ड, डेरिवेटिव, विदेशी सिक्योरिटीज़ आदिकेवल भारतीय म्यूचुअल फंड के डायरेक्ट प्लान — इंडेक्स फंड, ETF और SIF सहित
मैनेजर की न्यूनतम नेट वर्थ₹5 करोड़₹2 करोड़
फीसफिक्स्ड + परफॉर्मेंस फीसफिक्स्ड फीस (AUM के ~1% तक सीमित)

PRIM आपके लिए कितना काम का है?

यहीं ईमानदारी ज़रूरी है। ₹25 लाख अभी भी बड़ी रक्कम है, और म्यूचुअल फंड के डायरेक्ट प्लान आप ₹500 से भी शुरू कर सकते हैं — डायरेक्ट प्लान का सबसे बड़ा फ़ायदा यही है कि बिचौलिए की कमीशन-फीस नहीं कटती। फिर PRIM की ज़रूरत कहाँ है?

  • जिसे रक्कम लगाने के बाद फंड चुनने, बदलने और रीबैलेंस करने का जिम्मा किसी पेशेवर को देना है।
  • जिसे एक ही जगह पूरे पोर्टफोलियो की एक रिपोर्ट चाहिए, बिखरे हुए स्टेटमेंट नहीं।
  • जिसे लगता है कि भावनाओं में बहकर वह खुद ग़लत फ़ैसले ले लेता है, और इसलिए एक अनुशासित ढाँचा चाहिए।

और उलटी तरफ़: अगर आप खुद साल में दो बार अपने फंड देख-परख सकते हैं, तो PRIM आपके लिए ज़रूरी नहीं। वजह गणित है — ₹25 लाख पर 1% फीस यानी सालाना ₹25,000। यह रक्कम हर साल कटती रहती है, और लंबे समय में कंपाउंडिंग के कारण इसका असर सिर्फ़ ₹25,000 तक सीमित नहीं रहता। इसलिए सवाल 'PRIM अच्छा है या बुरा' नहीं, बल्कि 'इस फीस के बदले मुझे ऐसा क्या मिल रहा है जो मैं खुद नहीं कर सकता' — यह है।

नेट वर्थ, सीमाएँ और लागू होने की तारीख़ें

मैनेजरों पर शर्तें सख़्त बनी रहीं

  • सामान्य PMS: ₹5 करोड़ की न्यूनतम नेट वर्थ, जिसमें कम से कम 10% अनएनकम्बर्ड लिक्विड एसेट (आसानी से बिकने लायक रूप में) रखना ज़रूरी।
  • केवल PRIM देने वाले मैनेजर: ₹2 करोड़ की न्यूनतम नेट वर्थ, वही 10% लिक्विड शर्त।
  • मौजूदा मैनेजरों को अनुपालन के लिए समय दिया गया है — कुछ शर्तों के लिए 12 महीने, कुछ के लिए 36 महीने।

निवेशक के तौर पर इसका मतलब

मज़बूत नेट वर्थ शर्त का असर यह है कि बाज़ार में टिक न पाने वाले कच्चे खिलाड़ी लंबे समय तक नहीं रह पाएँगे। लेकिन इससे भी ज़्यादा काम की एक बात यह है: सामान्य पोर्टफोलियो मैनेजर म्यूचुअल फंड में सिर्फ़ डायरेक्ट प्लान खरीद सकते हैं, और उसके लिए ग्राहक से अलग फीस नहीं ले सकते। यानी 'रेगुलर प्लान खरीदकर ऊपर से फीस' वाली पुरानी गुंजाइश ख़त्म — आपका पैसा दो जगह नहीं कटेगा।

क्या आपकी चालू PMS प्रभावित होगी?

1 अप्रैल 2027 तक सब कुछ पुराने नियमों पर चलेगा, इसलिए घबराने की बात नहीं। लेकिन तैयारी अभी की जा सकती है — अपने मैनेजर से लिखित में पूछिए:

  1. वे नए ढाँचे में सामान्य PMS पर रहेंगे या PRIM पर जाएँगे?
  2. आपकी मौजूदा फीस-संरचना उसके बाद क्या होगी?
  3. आपके पोर्टफोलियो का बेंचमार्क क्या है और उससे तुलना कब-कब दिखाई जाएगी?

निवेश के नए रास्ते: IPO, अनलिस्टेड डेट, डेरिवेटिव, विदेशी शेयर

नियम 2026 का दूसरा बड़ा हिस्सा यह है कि पोर्टफोलियो मैनेजरों के हाथ पहले से लंबे किए गए हैं:

  • IPO और प्राइमरी मार्केट डेट: पोर्टफोलियो मैनेजर अब IPO में और डेट के प्राइमरी निर्गम में भी निवेश कर सकते हैं।
  • अनलिस्टेड इनवेस्टमेंट-ग्रेड डेट: डिस्क्रेशनरी PMS में ग्राहक की सहमति से, क्लाइंट AUM का 10% तक अनलिस्टेड, इनवेस्टमेंट-ग्रेड नॉन-कन्वर्टिबल डेट सिक्योरिटीज़ में।
  • एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव: क्लाइंट AUM के 1.25 गुना तक की छूट।
  • विदेशी सिक्योरिटीज़: DPMS और NDPMS, दोनों के ज़रिए।

यहाँ एक ज़रूरी सावधानी: नए रास्ते मतलब नई जोखिमें। अनलिस्टेड डेट में आप तुरंत बाहर नहीं निकल सकते (कम लिक्विडिटी), और डेरिवेटिव लीवरेज की वजह से नुकसान भी बड़ा हो सकता है। अगर आपका मैनेजर इन विकल्पों का इस्तेमाल करने लगे, तो सहमति-फॉर्म और जोखिम-प्रकटीकरण (risk disclosure) शांति से पढ़िए — यह शब्दावली नहीं, आपके पैसे की सुरक्षा का दस्तावेज़ है।

विज्ञापन कोड और डुअल लाइसेंस: आप पर क्या असर?

SEBI ने 8 अक्टूबर 2026 को बिचौलियों के लिए एक साझा विज्ञापन कोड (Common Advertising Code) भी जारी किया। इसका सबसे चर्चित हिस्सा यह है कि सेलिब्रिटी किसी ब्रांड या संस्था का विज्ञापन कर सकते हैं, पर किसी ख़ास प्रोडक्ट या सर्विस की सिफ़ारिश नहीं — और ऐसे विज्ञापनों को पहले से मंज़ूरी चाहिए।

साथ ही SEBI के एक कार्य-समूह में यह विचार चल रहा है कि व्यक्तिगत म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर (MFD) को रIA लाइसेंस (निवेश सलाहकार) लेने की अनुमति दी जाए या नहीं। यह अभी चर्चा का विषय है, कोई फ़ैसला नहीं हुआ।

आपके लिए इसका मतलब सीधा है: 'गारंटीड रिटर्न' और 'सेलिब्रिटी की सिफ़ारिश' वाले विज्ञापनों का ज़ोर कम होगा, और सलाह देने वाले की जवाबदेही पर ज़्यादा ज़ोर रहेगा। किसी भी पोर्टफोलियो-प्रोडक्ट को खरीदने से पहले देखिए कि फीस कितनी है, पैसा कहाँ लगेगा और बाहर निकलने के नियम क्या हैं।

निवेशक के लिए 5 व्यावहारिक सबक

  1. रक्कम से पहले ज़रूरत तय कीजिए। अगर लक्ष्य बस व्यवस्थित, नियमित निवेश है, तो SIP का रिकॉर्ड ₹32,490 करोड़ बताता है कि करोड़ों भारतीय म्यूचुअल फंड के ज़रिए ही यह काम कर रहे हैं — PMS कोई ज़रूरी अगला क़दम नहीं है।
  2. फीस को 20 साल की नज़र से देखिए। PRIM में ₹25 लाख पर 1% यानी सालाना ₹25,000। यह तुलना 'डायरेक्ट प्लान खुद खरीदने' से कीजिए — न कि 'रेगुलर प्लान + एजेंट कमीशन' से।
  3. लेन-देन की शर्तें लिखित में लीजिए। रूट (सामान्य PMS या PRIM), फिक्स्ड फीस, परफॉर्मेंस फीस, बेंचमार्क, निकासी की सीमाएँ और जोखिम-स्तर — ये पाँच बातें कागज़ पर माँगिए। SEBI के नए म्यूचुअल फंड नियम और RBI की ब्याज दर पर नज़र रखने वाले निवेशक के लिए यह आदत पहले से ही उपयोगी रही है।
  4. विविधता का मतलब 'अलग-अलग जगह फीस' नहीं। कई निवेशक SIP के साथ सोने जैसी अलग एसेट क्लास जोड़कर संतुलन बनाते हैं — इसके लिए भी PMS ज़रूरी नहीं।
  5. जल्दी मत कीजिए। नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे और बारीक शर्तें SEBI अभी तय कर रहा है। तब तक किसी भी मौजूदा पोर्टफोलियो को तोड़ने या बदलने की जल्दी नहीं है — पहले नई शर्तें पढ़िए, फिर फ़ैसला कीजिए।

निष्कर्ष

नियम 2026 का सार बहुत सीधा है: PMS नियमित, बेहतर ढाँचे में आ गया है — पर वह अब भी बड़े निवेशक का उत्पाद है। नया PRIM रूट ₹25 लाख पर एक विनियमित, म्यूचुअल-फंड-सीमित विकल्प ज़रूर देता है, लेकिन यह 'सस्ता PMS' नहीं, बल्कि 'एक अनुशासित, चुनी हुई सेवा' है — और इसकी फीस भी कटती है।

जिनकी रक्कम छोटी या मध्यम है, उनके लिए सबसे समझदारी भरा रास्ता अभी भी यही है: कम खर्च वाला डायरेक्ट प्लान या इंडेक्स फंड, लंबा निवेश-काल, और फैशन से दूर रहना। जिनके पास ₹50 लाख या उससे ज़्यादा है और वे पेशेवर निगरानी चाहते हैं — उनके लिए 2027 की नई व्यवस्था अधिक पारदर्शी और अधिक जवाबदेह होगी।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं। कुछ आँकड़े अधिसूचना और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं; अंतिम व बारीक शर्तें SEBI की अधिसूचित शर्तों से ही मानी जाएँ। निवेश से पहले SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकार से परामर्श कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

SEBI के नए PMS नियम कब से लागू होंगे?

नियम 7 अक्टूबर 2026 को अधिसूचित हुए और 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे। उस तारीख़ तक 2020 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। मौजूदा पोर्टफोलियो मैनेजरों को अनुपालन के लिए 12 से 36 महीने का समय दिया गया है।

PRIM रूट क्या है और इसमें कितना निवेश करना पड़ता है?

PRIM यानी 'Portfolio Managers Route for Investing in Mutual fund units' — ऐसा PMS जो केवल भारतीय म्यूचुअल फंड के डायरेक्ट प्लान (इंडेक्स फंड, ETF और SIF सहित) में निवेश करता है। इसमें न्यूनतम निवेश ₹25 लाख है, जबकि सामान्य PMS में यह ₹50 लाख है।

क्या ₹25 लाख से कम रकम पर भी PMS मिल सकता है?

नहीं। नियम 2026 के बाद भी ₹25 लाख (PRIM) सबसे कम सीमा है। इससे कम रकम के लिए म्यूचुअल फंड के डायरेक्ट प्लान या SIP ही व्यावहारिक रास्ता है।

PRIM और सामान्य PMS में सबसे बड़ा फर्क क्या है?

तीन फर्क: न्यूनतम निवेश (₹25 लाख बनाम ₹50 लाख), निवेश का दायरा (केवल म्यूचुअल फंड के डायरेक्ट प्लान बनाम शेयर/बॉन्ड/डेरिवेटिव सहित पूरा बाज़ार), और मैनेजर की न्यूनतम नेट वर्थ (₹2 करोड़ बनाम ₹5 करोड़)।

PRIM या PMS की फीस कितनी होती है?

बोर्ड ने PRIM में फिक्स्ड फीस को क्लाइंट AUM के 1% तक सीमित करने के संकेत दिए हैं; बारीक शर्तें SEBI अलग से तय करेगा। सामान्य PMS में फिक्स्ड फीस के साथ परफॉर्मेंस फीस भी होती है, इसलिए अनुबंध में दोनों अलग-अलग पढ़कर समझिए।

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