Income Tax Act 2025: अगली ITR से पहले जानिए क्या बदला, क्या नहीं

DeepShodh TeamOctober 17, 202612 min read

1 अप्रैल 2026 से 1961 की जगह Income-tax Act 2025 लागू है। दरें वही, पर सेक्शन, फॉर्म और "टैक्स ईयर" बदल गए — 2027 की ITR से पहले हिंदी में पूरी गाइड।

अगर आपने यह मान लिया है कि "आयकर कानून बदला, तो मुझे क्या करना — CA देख लेगा", तो यह लेख उसी आराम को थोड़ा हिलाने के लिए है। 1 अप्रैल 2026 से भारत में 1961 का आयकर कानून नहीं, बल्कि Income-tax Act, 2025 (अधिनियम 30 of 2025) लागू है, जो वित्त अधिनियम 2026 के संशोधनों के साथ अमल में है।

अच्छी खबर पहले: आपकी टैक्स दरें नहीं बदलीं। चिंता की बात यह है कि जिस भाषा में आपका पूरा कर-पेपरवर्क लिखा जाता है — सेक्शन नंबर, फॉर्म के नाम, "असेसमेंट ईयर" — वह सब बदल गया है। 2026 में जो ITR आप भर रहे हैं वह पुराने कानून के नंबरों पर है, और 2027 में भरने वाली ITR पहली बार नए कानून के नंबरों पर होगी। यानी असर अगले साल दिखेगा, पर तैयारी इसी साल करनी है।

इस लेख में सिर्फ़ वह है जो आपके काम का है: क्या बदला, आपके Form 16 और TDS में कहाँ दिखेगा, कौन-सी बातें अभी तय नहीं हैं, और आज कौन-से पाँच काम कर लेने चाहिए।

एक नज़र में: क्या बदला, क्या वैसा ही है

क्यापहले (1961 का कानून)अब (2025 का कानून)
लागू होने की तारीख़1962 से प्रभावी1 अप्रैल 2026 से
अवधि की शब्दावलीपिछला वर्ष (Previous Year) + असेसमेंट ईयरकेवल टैक्स ईयर (Tax Year)
सेक्शन नंबरजैसे 17(1), 17(2), 194C, 194S16, 17 और 392/393/394 जैसे नए नंबर
नियमIncome-tax Rules, 1962Income-tax Rules, 2026 (20 मार्च 2026 को अधिसूचित)
टैक्स दरें—कोई बदलाव नहीं
ITR फॉर्म (ITR-1 से ITR-7), TDS रिटर्न (24Q, 26Q), देय तिथियाँ—नाम और ढाँचा वही
पहला रिटर्न जिस पर नए नंबर लागू—टैक्स ईयर 2026-27 का, जो 2027 में भरेगा

इस पूरे बदलाव का एक वाक्य में सार यह है: नियम वही हैं, नंबर नए हैं। जो लोग पुराने सेक्शन नंबर रटकर फॉर्म भरते थे, उनके लिए यही एक वाक्य सबसे ज़्यादा काम का है।

"टैक्स ईयर" क्या है, और असेसमेंट ईयर क्यों हटा?

पुराने कानून में दो अवधियाँ थीं। पिछला वर्ष वह साल जिसमें आपने कमाया, और असेसमेंट ईयर उसके अगला साल, जिसमें रिटर्न भरा और आकलन हुआ। दो अलग-अलग वित्त वर्षों वाली यह व्यवस्था नए कानून में हटा दी गई है। अब सिर्फ़ टैक्स ईयर है — 12 महीने की वह अवधि जो वित्त वर्ष के भीतर आती है, और जिसके लिए दरें तय होती हैं और आकलन होता है।

व्यवहार में इसका मतलब: फॉर्म और नोटिस में अब "AY 2027-28" जैसा कुछ नहीं लिखा मिलेगा। आपको "टैक्स ईयर 2026-27" दिखेगा — जिसका अर्थ वही आय है जो 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 के बीच कमाई गई।

2026 में भरने वाली ITR: पुराने नंबर ही चलेंगे

यह सबसे ज़्यादा उलझाने वाली बात है, इसलिए साफ़ लिख रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) का रिटर्न — जो 2026 में भरा जा रहा है — पूरी तरह 1961 के कानून के तहत है। उस पर पुराने सेक्शन नंबर ही लिखे जाएँगे, और उस साल या उससे पहले के किसी नोटिस, आदेश या अपील पर भी पुराने नंबर ही चलेंगे।

2027 की ITR: नए नंबर, नई शब्दावली

1 अप्रैल 2026 से मिली आय के लिए — यानी टैक्स ईयर 2026-27 — पोर्टल, चालान, TDS रिटर्न और Form 16 सब नए सेक्शन नंबरों पर आएँगे। इसलिए दोनों नंबर-सीरीज़ कुछ साल तक साथ-साथ चलेंगी। किसी भी पुराने लेख, YouTube वीडियो या CA के फॉरवर्ड किए मैसेज को देखकर फ़ैसला करने से पहले यह पूछ लीजिए: यह किस टैक्स ईयर की बात कर रहा है?

सेक्शन नंबर बदलने से असली फर्क कहाँ पड़ेगा

Form 16 और सैलरी स्लिप

सबसे पहला झटका यहीं लगेगा। "सैलरी" और "परक्विज़िट" की परिभाषाएँ पहले सेक्शन 17(1) और 17(2) में थीं; नए कानून में ये सेक्शन 16 और 17 हो गई हैं। पेरोल सॉफ्टवेयर, Form 16 का फॉर्मैट और आगे का रिटर्न — तीनों में यही नए संदर्भ आएँगे। अगर आप HR या फाइनेंस टीम में हैं, तो यह आपके लिए इस साल की सबसे ठोस तकनीकी चीज़ है।

TDS: करीब 80 धाराएँ, तीन सेक्शन में

TDS के लिए पुराने कानून में 192 से 196D तक लगभग 80 सेक्शन थे। नए कानून में इन्हें समेटकर दो सेक्शन बना दिए गए हैं — 392 (सैलरी पर TDS) और 393 (बाकी सभी भुगतान, तालिकाओं में)। TCS अब सेक्शन 394 में आता है।

पुराना प्रावधाननया प्रावधान
सेक्शन 194C (ठेकेदार को भुगतान पर TDS)सेक्शन 393(1), तालिका क्रम 6(i)
सेक्शन 194S (वर्चुअल डिजिटल एसेट पर TDS)सेक्शन 393(1), तालिका क्रम 8(vi)
TDS की धाराएँ 192–196Dसेक्शन 392 (सैलरी) व 393 (शेष)
TCS (अध्याय XVII-B)सेक्शन 394

आपके लिए नतीजा यह है कि ट्रेडिंग ऐप, क्रिप्टो एक्सचेंज और बैंक की TDS एंट्री अब नए नंबर दिखाएँगी। रकम वही कटेगी — बस सर्टिफिकेट और स्टेटमेंट में लिखा नंबर बदल जाएगा।

रिटर्न भरना: छह अलग धाराएँ, एक सेक्शन

पुराने कानून में मूल रिटर्न, देर से भरा रिटर्न, संशोधित रिटर्न और अपडेटेड रिटर्न — चारों अलग-अलग उप-धाराओं में बिखरे थे। नए कानून का सेक्शन 263 इन सबको एक जगह लाता है: उप-धारा (1) में मूल रिटर्न, (4) में देर से भरा रिटर्न, (5) में संशोधित और (6) में अपडेटेड रिटर्न। ढाँचा वही है — कौन अनिवार्य रूप से फाइल करेगा और देय तिथियाँ क्या हैं, इसमें कोई बदलाव नहीं।

नोटिस, अपील और पुराने मामले

1 अप्रैल 2026 को जो मामले चल रहे थे — पुनर्निर्धारण (reassessment), अपील, TDS की जाँच, हानि का सेट-ऑफ — वे नए कानून में भी जारी रहेंगे, पर उनका इलाज संक्रमण (transition) के नियमों से होगा। CBDT ने इसके लिए अलग "इंटरप्ले एंड ट्रांज़िशन" FAQ जारी किया है, जो अग्रिम कर, रिफंड, रिटर्न, पुनर्निर्धारण, TDS, अपील और हानि — सातों विषयों पर सवाल-जवाब देता है। अगर आपका कोई पुराना मामला लंबित है, तो अपने CA से यही FAQ मँगवाइए।

सैलरी वालों के लिए 4 ठोस बदलाव (Rules 2026 के साथ)

कानून के साथ Income-tax Rules, 2026 भी 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए। ये 1962 के नियमों की जगह लेते हैं और सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव यह है कि सारे फॉर्म अब नियमों की अनुसूची III (Appendix III) में हैं। फॉर्म अब प्री-फिल और स्वचालित मिलान (reconciliation) के हिसाब से दोबारा बनाए गए हैं, जिससे हाथ से भरने का काम घटेगा।

सैलरी पाने वालों के लिए चार बदलाव खास तौर पर मायने रखते हैं:

  1. HRA के लिए महँगे शहरों की सूची बढ़ी — यानी कुछ और शहर अब 50% वाली श्रेणी में आ सकते हैं। अगर आप किसी उभरते महानगर में किराए पर रहते हैं, तो यह सीधा फ़ायदा हो सकता है।
  2. कुछ निर्दिष्ट भत्तों (allowances) की छूट सीमा बढ़ी — पुरानी सीमाएँ अब लागू नहीं, नई सीमाएँ पेरोल में जानी चाहिए।
  3. परक्विज़िट का मूल्यांकन बदला — खासकर खाने-पीने की सुविधा, उपहार और कार के लिए। कंपनी की ओर से मिलने वाली सुविधाओं का कर-मूल्य अब नए तरीके से निकलेगा।
  4. विदेशी टैक्स क्रेडिट और सैलरी से जुड़े कुछ फॉर्म बदले — NRI या विदेश में टैक्स कटने वाले कर्मचारियों के लिए यह सीधा असर डालता है।

यहाँ एक ईमानदार चेतावनी ज़रूरी है: ऊपर के चारों बदलाव नियमों के हैं, और इनकी बारीक गणना आपके पेरोल सिस्टम पर निर्भर है। इसलिए HR से एक सवाल पूछिए — "Form 16 और HRA की गणना Rules 2026 के हिसाब से हो रही है या पुराने 1962 के नियमों से?"

8 अक्टूबर 2026 का ताज़ा बदलाव: Form 161

अगर आपको लगा कि कानून आ गया तो काम खत्म, तो नहीं। CBDT ने 8 अक्टूबर 2026 को Income-tax (Sixth Amendment) Rules, 2026 जारी करके नियम 231 में "imposition" के बाद "or waiver" शब्द जोड़े और Form 161 का संशोधित संस्करण लागू किया। यह संशोधन कानून के सेक्शन 533 सहपाठ सेक्शन 440 के तहत जारी हुआ।

आसान भाषा में: पहले यह फॉर्म सिर्फ़ जुर्माना लगाने के लिए था, अब यह जुर्माना माफ़ कराने की अर्ज़ी के लिए भी इस्तेमाल होगा। जिनका कोई पुराना जुर्माना लंबित है और जो माफ़ी की अर्ज़ी डालना चाहते हैं, उनके लिए यह छोटा-सा नोटिस बड़ा काम का है — पुराना फॉर्म भरने से अर्ज़ी अधूरी मानी जा सकती है।

आज ही कर लेने वाले 5 काम

  1. अपना टैक्स ईयर लिखकर रखिए। किसी भी फॉर्म, नोटिस या सलाह को पढ़ते वक़्त पहले पहचानिए कि वह किस टैक्स ईयर का है। 2025-26 और 2026-27 के नियम अलग हैं।
  2. पेरोल टीम से Form 16 का नया फॉर्मैट माँगिए। खासकर अगर आपकी कंपनी में विदेशी कर्मचारी, ESOP, कार या कैंटीन सुविधा है — परक्विज़िट का मूल्यांकन बदल गया है।
  3. पुराने सेक्शन नंबर भूल जाइए — पर नाम याद रखिए। छूट और रिबेट के प्रावधान हटे नहीं हैं, वे फिर से क्रमांकित हुए हैं। नंबर याद रखने की जगह प्रावधान का नाम याद रखिए (जैसे "धारा 80C वाली छूट" कहिए), और नंबर अधिनियम या CBDT के सेक्शन-मैप से मिलाइए। किसी ब्लॉग या वीडियो में लिखा नंबर अकेले भरोसे के लायक नहीं है।
  4. AIS/TIS और अपने ब्योरों का मिलान कीजिए। नए फॉर्म प्री-फिल और ऑटो-रेकंसिलिएशन पर बने हैं — यानी विभाग जो दिखा रहा है और आपके पास जो है, उनका अंतर जल्दी पकड़ा जाएगा। बैंक ब्याज, ब्रोकर की कैपिटल गेन और FD की जानकारी एक जगह इकट्ठी कीजिए।
  5. पुराने कागज़ात रखिए। पुराने सालों की कार्यवाही अभी बंद नहीं हुई है, इसलिए 2026 से पहले के रिटर्न, Form 16 और नोटिस कम से कम सात साल तक सुरक्षित रखना समझदारी है। यह कानूनी सीमा नहीं, व्यावहारिक सावधानी है — लेकिन पुराना मामला खुलने पर यही कागज़ बचाते हैं।

5 गलतफ़हमियाँ जो महँगी पड़ सकती हैं

  • "दरें बदल गईं।" नहीं। स्लैब और दरों में बदलाव नहीं हुआ; बदलाव भाषा, नंबर और फॉर्म का है।
  • "2026 में भरने वाली ITR भी नए कानून से होगी।" नहीं। वह पूरी तरह 1961 के कानून के तहत है।
  • "नए कानून में छूटें खत्म हो गईं।" नहीं। प्रावधान जारी हैं, बस उनके नंबर बदले हैं और भाषा सरल की गई है।
  • "क्रिप्टो और सोने-ETF पर कुछ नहीं बदला।" क्रिप्टो और टोकन वाले एसेट्स की परिभाषा (VDA) अब कानून में साफ़ है, और उस पर TDS नए सेक्शन 393 में आता है — स्टेटमेंट में नंबर बदला दिखेगा। सोने के ETF जैसे विकल्पों की कर-गणना पहले की तरह अलग नियमों से चलती है, इसलिए दोनों को एक ही खाते में मत मिलाइए।
  • "नया कानून आया तो पुराने नोटिस खत्म।" नहीं। पुराने मामले संक्रमण नियमों के तहत चलते रहेंगे।

निष्कर्ष: यह सिर्फ़ नाम बदलने की कहानी नहीं है

Income-tax Act, 2025 को सिर्फ़ "पुराना कानून नए नंबरों में" कहकर खारिज करना आसान है, पर यह आपके पैसे पर सीधा असर डालने वाला साल है। सैलरी वालों के लिए HRA शहरों की सूची, भत्तों की नई सीमाएँ और परक्विज़िट का नया मूल्यांकन ठोस बदलाव हैं; क्रिप्टो और विदेशी आय वालों के लिए फॉर्म और TDS का नया ढाँचा। और जिनका कोई पुराना विवाद चल रहा है, उनके लिए संक्रमण के नियम ही तय करेंगे कि मामला किस रास्ते जाएगा।

सबसे आसान नियम याद रखिए: नियम वही, नंबर नए। जब भी कोई नई जानकारी मिले, पहले पूछिए — कौन-सा टैक्स ईयर, कौन-सा फॉर्म, और क्या स्रोत CBDT या अधिनियम का है। निवेश की योजना बनाते वक़्त भी यही आदत काम आती है: SIP के रिकॉर्ड आँकड़े हों या PMS के नए नियम, फ़ैसला दस्तावेज़ पढ़कर ही कीजिए।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, कर या निवेश सलाह नहीं। तथ्य Income-tax Act, 2025, Income-tax Rules, 2026, CBDT के FAQ और 8 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना पर आधारित हैं। धारा 80C, 87A और 44AD जैसे प्रावधानों के नए नंबर इस लेख में नहीं दिए गए हैं क्योंकि लेखन के समय वे प्राथमिक स्रोत से पुष्ट नहीं थे — कृपया उन्हें अधिनियम के पाठ या CBDT के सेक्शन-मैप से जाँचिए। अपने मामले में पंजीकृत कर सलाहकार से परामर्श कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Income Tax Act 2025 कब से लागू हुआ?

1 अप्रैल 2026 से। यह अधिनियम 30 of 2025 है और वित्त अधिनियम 2026 के संशोधनों के साथ लागू है। इसके साथ Income-tax Rules, 2026 भी 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए, जो 1962 के नियमों की जगह लेते हैं।

क्या 2026 में भरने वाली मेरी ITR नए कानून के तहत होगी?

नहीं। वित्त वर्ष 2025-26 का रिटर्न — जो 2026 में भरा जा रहा है — पूरी तरह 1961 के कानून के तहत है और उस पर पुराने सेक्शन नंबर ही लागू होंगे। नए नंबर टैक्स ईयर 2026-27 की आय से शुरू होते हैं, जिसका रिटर्न 2027 में भरेगा।

असेसमेंट ईयर (AY) की जगह अब क्या लिखा जाएगा?

अब सिर्फ़ टैक्स ईयर लिखा जाएगा। नए कानून में "पिछला वर्ष" और "असेसमेंट ईयर" दोनों की जगह एक ही अवधि आ गई है — 12 महीने का वह टैक्स ईयर जिसके लिए दरें तय होती हैं और आकलन होता है। 2026-27 के लिए यह 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक है।

क्या नए कानून में टैक्स की दरें बढ़ीं?

नहीं। दरों और स्लैब में बदलाव नहीं हुआ। बदलाव कानून की भाषा, सेक्शन नंबरों, फॉर्म और शब्दावली का है। इसीलिए कहा जाता है — नियम वही, नंबर नए।

TDS की धारा 194C और 194S अब क्या है?

194C (ठेकेदार को भुगतान) अब सेक्शन 393(1) की तालिका, क्रम 6(i) में है और 194S (वर्चुअल डिजिटल एसेट पर TDS) सेक्शन 393(1) की तालिका, क्रम 8(vi) में। सैलरी पर TDS अब सेक्शन 392 में और TCS सेक्शन 394 में आता है।

Form 161 में 8 अक्टूबर 2026 को क्या बदला?

CBDT ने Income-tax (Sixth Amendment) Rules, 2026 से नियम 231 में "imposition" के बाद "or waiver" जोड़ा और Form 161 का संशोधित संस्करण लागू किया। अब यह फॉर्म जुर्माना लगाने के साथ-साथ जुर्माना माफ़ कराने की अर्ज़ी के लिए भी इस्तेमाल होगा।

सैलरी वालों को सबसे पहले क्या करना चाहिए?

तीन काम: अपने HR/पेरोल से पूछिए कि Form 16 और HRA की गणना Rules 2026 के हिसाब से हो रही है या नहीं; अपने बैंक, ब्रोकर और FD के ब्योरों का AIS/TIS से मिलान कीजिए; और पुराने सालों के कागज़ात सुरक्षित रखिए क्योंकि पुराने मामले संक्रमण नियमों के तहत चलेंगे।

स्रोत: खुद पढ़ने के लिए

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